देश भर में वाहन खरीदने वालों के लिए इस महीने से कुछ अहम नियम बदल गए हैं। कई राज्यों में एक साथ नए प्रावधान लागू हो चुके हैं जिनकी जानकारी ज्यादातर खरीदारों को नहीं है। डीलरशिप पर पहुंचने के बाद ग्राहकों को अचानक नए दस्तावेजों की मांग का सामना करना पड़ रहा है।
उत्सर्जन मानक में इन बदलावों के समय ने कई हितधारकों को चौंका दिया है। लंबित डिलीवरी की समीक्षा केस-दर-केस आधार पर की जा रही है। जिन ग्राहकों ने एडवांस पेमेंट किया है वे विशेष रूप से चिंतित हैं कि नई स्थिति उनके समझौतों को कैसे प्रभावित करती है।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि उत्सर्जन मानक मौजूदा खरीदार संकोच का एक प्रमुख कारक है। पिछले पखवाड़े के बिक्री आंकड़े कुछ सेगमेंट में ध्यान देने योग्य मंदी दिखाते हैं। डीलर ग्राहकों की चिंताओं को स्वीकार करते हैं लेकिन दावा करते हैं कि उनके पास कंपनी मुख्यालय से सीमित जानकारी है।
पंजीकरण प्रक्रिया का विश्लेषण करने वाले तकनीकी विशेषज्ञों का सुझाव है कि निहितार्थ तत्काल खरीदार प्रभाव से परे हैं। रीसेल वैल्यू, बीमा लागत और रखरखाव खर्च जैसे दीर्घकालिक पहलू सभी प्रभावित हो सकते हैं। मालिकों को अपने वाहन लेनदेन से संबंधित सब कुछ दस्तावेजित करने की सिफारिश की जाती है।
उद्योग रिपोर्टों के मुताबिक पंजीकरण प्रक्रिया का मुद्दा हालिया नियामक समीक्षाओं के बाद सामने आया है। कई ब्रांड इसमें शामिल हैं लेकिन प्रतिक्रियाएं काफी अलग-अलग हैं। कुछ निर्माताओं ने सार्वजनिक बयान जारी किए हैं जबकि अन्य केवल डीलर नेटवर्क के माध्यम से पूछताछ संभाल रहे हैं।
आने वाले हफ्तों में गाड़ी खरीदने की योजना बना रहे लोगों को फैसला लेने से पहले मौजूदा स्थिति की पुष्टि कर लेनी चाहिए। हालात अभी भी तरल हैं और जल्द ही नए अपडेट आने की उम्मीद है। इस अवधि के दौरान दस्तावेज तैयार रखना और डीलरों के साथ लिखित संवाद बनाए रखना उचित रहेगा।
मार्केट में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। आरटीओ नियम को लेकर अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नियम लागू हो रहे हैं। इससे खरीदारों के लिए सही निर्णय लेना और मुश्किल हो गया है। कई लोग तो अब इंतजार करने का फैसला कर रहे हैं कि स्थिति स्पष्ट हो जाए।